धड़ से गायब सर लगे....

जब भी देखूं आईना तो धड़ से गायब सर लगे
सरकटा धड़ देख अपना सच बहुत ही डर लगे

मुझको तुम्हारी बेवफाई पर यकीं बिल्कुल न था
लेकिन मुझे करना पड़ा जब पीठ पर खंज़र लगे

डाईनिंग टेबुल के नीचे से पकड़ता रोटियां
शख्स ये सरकारी दफ्तर का कोई अफसर लगे

अल्लसुबह परमात्मा का नाम ले कर चीखना
तुम यकीं कर लो तो कर लो मुझको आडंबर लगे

दोस्तों की देख कर नज़रें इनायत 'मौदगिल'
दोस्तों से दो कदम का फासला बेहतर लगे
--योगेन्द्र मौदगिल

29 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अच्छा चित्र खींचा है।
बधाई।

Science Bloggers Association said...

सार्थक रचना है, जो हमें सचेत करती है।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सही कहा.

रामराम.

Nirmla Kapila said...

दोस्तों की देख कर नज़रे इनायत मौदगिल
दोस्तों से दो कदम का फासला बेहतर लगे है
क्या खूब कहा यूँ तो पूरी गज़ल खूबसूरत है मगर ये सीख देती अभिव्यक्ति दिल को छू गयी आभार्

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

सरकारी अफसर का सही चित्रण किया है!

हिमांशु । Himanshu said...

बेहतरीन । सबकी सच्चाई ।

अभिषेक ओझा said...

'डाईनिंग टेबुल के नीचे से पकड़ता रोटियां
शख्स ये सरकारी दफ्तर का कोई अफसर लगे'
सत्य वचन !

सुशील कुमार छौक्कर said...

बेहतरीन ग़ज़ल।
दोस्तों की देख कर नज़रें इनायत मौदगिल
दोस्तों से दो कदम का फासला बेहतर लगे

ये ज्यादा ही सच्चा लगा।

ओम आर्य said...

बहुत ही बढिया शेर लिखे हि आपने ..........विविधता है ...सुन्दर ........

रविकांत पाण्डेय said...

दोस्तों की देख कर नज़रें इनायत मौदगिल
दोस्तों से दो कदम का फासला बेहतर लगे

सच कहा और सलीके से कहा। इसके लिये आप धन्यवाद के पात्र हैं।

राज भाटिय़ा said...

मुझको तुम्हारी बेवफाई पर यकीं बिल्कुल न था
लेकिन मुझे करना पड़ा जब पीठ पर खंज़र लगे
बहुत सुंदर योगेन्दर जी होश भी तभी आती है.
धन्यवाद

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बहुत खूबसूरत तरीके से सचाई बयाँ की है।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

ऐसे बहुत से हैं जिनके धड़ पर सिर हैं ही कहाँ.

नीरज गोस्वामी said...

डाईनिंग टेबुल के नीचे से पकड़ता रोटियां
शख्स ये सरकारी दफ्तर का कोई अफसर लगे
भाई जी जिंदाबाद...एक दम नयी बात पैदा की है शायरी में...मजा आ गया पढ़ कर...आप का जवाब नहीं.
नीरज

कुलदीप "अंजुम" said...

डाईनिंग टेबुल के नीचे से पकड़ता रोटियां
शख्स ये सरकारी दफ्तर का कोई अफसर लगे

दोस्तों की देख कर नज़रें इनायत मौदगिल
दोस्तों से दो कदम का फासला बेहतर लगे

bahut khubsurat

Shefali Pande said...

डाईनिंग टेबुल के नीचे से पकड़ता रोटियां
शख्स ये सरकारी दफ्तर का कोई अफसर लगे

इनपर यूँ नज़र रखता है जो
हमको तो ये कवि मोदगिल लगे ....

Shefali Pande said...

डाईनिंग टेबुल के नीचे से पकड़ता रोटियां
शख्स ये सरकारी दफ्तर का कोई अफसर लगे

इनपर यूँ नज़र रखता है जो
हमको तो ये कवि मोदगिल लगे ....

महेन्द्र मिश्र said...

मुझको तुम्हारी बेवफाई पर यकीं बिल्कुल न था
लेकिन मुझे करना पड़ा जब पीठ पर खंज़र लगे

बहुत बढ़िया योगन्द्र जी क्या बात है बधाई.

राजीव तनेजा said...

दोस्तों की देख कर नज़रें इनायत मौदगिल
दोस्तों से दो कदम का फासला बेहतर लगे

बहुत बढिया

डॉ. मनोज मिश्र said...

जब भी देखूं आईना तो धड़ से गायब सर लगे
सरकटा धड़ देख अपना सच बहुत ही डर लगे.....
bahut khoobsoorat.

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

बिल्कुल सही लिखा है जी आपने....बहुत बढिया!

"अर्श" said...

SAARI SACHCHAYEEYAAN KITANE SALIKE SE KAHI HAI AAPNE.... MAGAR IS SHE'R KE KYA KAHANE... BAHOT KHUBSURATI SE HAK ADAA KIYA HAI AAPNE....

दोस्तों की देख कर नज़रें इनायत मौदगिल
दोस्तों से दो कदम का फासला बेहतर लगे

BAHOT BAHOT BADHAAYEE IS SHE'R KE LIYE


ARSH

‘नज़र’ said...

kheench laayee aapkii rachana hamein...

श्रद्धा जैन said...

मुझको तुम्हारी बेवफाई पर यकीं बिल्कुल न था
लेकिन मुझे करना पड़ा जब पीठ पर खंज़र लगे

bahut sachha sher

Dr. Amar Jyoti said...

'दोस्तों से दो कदम का फ़ासला बेहतर लगे'
बहुत कठोर पर सटीक व्यंग।
बधाई।

Yogesh said...

bahut badhiya..

Badhaai !!

दिगम्बर नासवा said...

दोस्तों की देख कर नज़रें इनायत मौदगिल
दोस्तों से दो कदम का फासला बेहतर लगे

आपका daarshnik andaaz भी lajawaab है guru dev............. mast लिखा है

RC said...

Bahut badhiya ashaar padhne ko mile Yogendra ji. Khoobsoorat Gazal.

मुझको तुम्हारी बेवफाई पर यकीं बिल्कुल न था
लेकिन मुझे करना पड़ा जब पीठ पर खंज़र लगे

दोस्तों की देख कर नज़रें इनायत मौदगिल
दोस्तों से दो कदम का फासला बेहतर लगे

Bahut khoob !

God bless
RC

कंचनलता चतुर्वेदी said...

bahut badhia.....