जय राम जी की......

जय राम जी की......
आज बैठे-ठाले अचानक ब्लॉग की याद आ गई...
बीच में अकस्मात ही ब्लागिंग से मोह भंग हो गया था..... फेसबुक भा गई थी दरअसल.....लेकिन अब लगता है कि वो इस की भी अम्माँ है.... और अपन फिर लौट आए....
हालाँकि लगता है दिन गलत चुन लिया....
आज  चंडीगढ़ निकल रहा हूँ...कवि सम्मेलन है.. 
परसों भटिंडा....
२८ को श्रीगंगानगर नवम्बर में 
अभी 29 तक व्यस्तता रहेगी...उस के बाद अभ्यास जारी रख सकूंगा.....
तो इस वायदे के साथ कि  
ब्लाग पर अब मिलना-मिलाना होता रहेगा..... 
फिलहाल विदा लेता हूँ......

मैंने हार नहीं मानी............

कुछ पंक्तियाँ किसी के लिए......
रिश्तों पर इलज़ाम सहे.
प्रेम के ढेरों नाम सहे..

दुनिया भर से यारी में,
दुश्मन आठों याम सहे..

उस की मर्ज़ी वो जाने,
हम ने चारों धाम सहे..

तेरी-मेरी हस्ती क्या,
मीरा ने घनश्याम सहे..

दूर बहुत फल 'पूजा का,
दर्द बहुत गुलफाम सहे.

मैंने हार नहीं मानी,
मैंने तो अंजाम सहे..
--योगेन्द्र मौदगिल

एक छंद फ़क़त आपके लिए........

एक छंद फ़क़त आपके लिए........

बड़े-बड़े बंगले हैं, बंगलों में जंगलें हैं,
जंगलों में बंधे हुए, श्वेत श्वान देख लो..
वक्ष को उघाड़ें और देह को उभारें ऐसे,
फ़िल्मी-मसाले जैसे परिधान देख लो..
हेरोइन, कोनीन, दारू, चरस का फैशन है,
गली-गली अपराधों की दूकान देख लो..
गुटखे व बियर को चाट-चाट 'मौदगिल",
बच्चे सब हो गए है नौजवान देख लो...
---योगेन्द्र मौदगिल