जय राम जी की......
आज बैठे-ठाले अचानक ब्लॉग की याद आ गई...
बीच में अकस्मात ही ब्लागिंग से मोह भंग हो गया था..... फेसबुक भा गई थी दरअसल.....लेकिन अब लगता है कि वो इस की भी अम्माँ है.... और अपन फिर लौट आए....
हालाँकि लगता है दिन गलत चुन लिया....
आज बैठे-ठाले अचानक ब्लॉग की याद आ गई...
बीच में अकस्मात ही ब्लागिंग से मोह भंग हो गया था..... फेसबुक भा गई थी दरअसल.....लेकिन अब लगता है कि वो इस की भी अम्माँ है.... और अपन फिर लौट आए....
हालाँकि लगता है दिन गलत चुन लिया....
आज चंडीगढ़ निकल रहा हूँ...कवि सम्मेलन है..
परसों भटिंडा....
२८ को श्रीगंगानगर नवम्बर में
अभी 29 तक व्यस्तता रहेगी...उस के बाद अभ्यास जारी रख सकूंगा.....
तो इस वायदे के साथ कि
ब्लाग पर अब मिलना-मिलाना होता रहेगा.....
फिलहाल विदा लेता हूँ......