तन मन जुटा कमाई में....

तन मन जुटा कमाई में.
अनबन भाई-भाई में.

रिश्तेदारी कैसे हो..?
बकरे और कसाई में.

मिलने जैसा वही मज़ा,
आने लगा जुदाई में.

पेट नहीं भरता पूरा,
अब तो नेक कमाई में.

बुड्ढा, ग़म खाकर बोला,
दे दो ज़हर, दवाई में.

वो भी आसमान पर हैं,
हम भी हवा-हवाई में.
--योगेन्द्र मौदगिल

40 comments:

seema gupta said...

पेट नहीं भरता अब तो नेक कमाई में .....
" जिन्दगी की सच्चाई को व्यक्त करती भावनत्मक अभिव्यक्ति..."


Regards

"अर्श" said...

BUDHHA GAM KHAKAR BOLA...WAAH KYA KHUB KAHI AAPNE.. BAHOT KHUB RAHI YE KAHAN BHI DHERO BADHAAEE AAPKO...


ARSH

मा पलायनम ! said...

तन मन जुटा कमाई में.
अनबन भाई-भाई में....
समाज की सही तस्वीर .

mehek said...

बुड्ढा, ग़म खाकर बोला,
दे दो ज़हर, दवाई में.

वो भी आसमान पर हैं,
हम भी हवा-हवाई में
waah shandaar gazal

Shefali Pande said...

बहुत अच्छा .....
भूलभुलैय्या की क्या है ज़रुरत
खोए हैं आपकी शायरी में

Anil Pusadkar said...

कमाल है आपकी कलम मे।

मोना परसाई "प्रदक्षिणा" said...

बुड्ढा, ग़म खाकर बोला,
दे दो ज़हर, दवाई में.

vaah..bahut khub

Science Bloggers Association said...

सही कहा बंधु, कमाई की ही दुनिया है।

-----------
तस्‍लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन

Mumukshh Ki Rachanain said...

सही कहा बंधु

बुड्ढा, ग़म खाकर बोला,
दे दो ज़हर, दवाई में.

समाज की सही तस्वीर .

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

"वो भी आसमान पर है
हम भी हवा हवाई में"

भई वाह्! मौदगिल जी, कमाल दर कमाल!!!!

पंकज सुबीर said...

रिश्‍तेदारी कैसे हो बकरे और कसाई में
वाह योगेंद्र जी एसा लगता है कि तंज की ग़ज़लों में आप बड़े ही विशेषज्ञ हैं । एसी चिपकाते हैं कि बस ।
सुबीर

कुश said...

पहले ही शेर से बाजी मार ले गये आप तो.. बहुत ही उम्दा..

आलोक सिंह said...

बहुत खूब , एकदम समय के हिसाब से लिखा है आपने .

ताऊ रामपुरिया said...

बकरा और कसाई? बहुत लाजवाब .

रामराम.

दिगम्बर नासवा said...

वाह वाह वाह ...सुभान अल्ला.......
एक से बढ़ कर एक.........हकीकत बयान करते........सच से ज्यादा सच्चे शेर क्या बात है......बेहतरीन.

ये बेफिक्र सा अंदाज़ है आपका मोदगिल भाई

सुशील कुमार छौक्कर said...

आज तस्वीर पेश कर दी जी और वो भी इतना बेहतरीन लिख कर।
बुड्ढा, गम खाकर बोला,
दे दो ज़हर , दवाई में।

कल ही पानीपत गया था एक गाँव में जहाँ पता लगा कि एक किसान घर जहाँ गाँव के काफी बुडढे सुबह आ जाते है क्योंकि घर वाले निकाल देते है और सारे बुड्ढे मिलकर वहाँ मिला भोजन खाते है और शाम को घर जाते है। सुनकर बहुत दुख हुआ। कि गाँवो में भी ऐसा होने लगा। अब तक तो शहरों में ही सुना था ओल्ड ऐज होम।

संजय तिवारी ’संजू’ said...

पहले शेर ने ही तन मन जुटा कमाई में.
अनबन भाई-भाई में....बहुत सही समाज का यही आईना है

शोभा said...

वाह बहुत सुन्दर लिखा है।

SWAPN said...

wah maudgil ji ek baar phir, gazab dha diya, lajawaab rachna, bahut badhai.

SWAPN said...

wah maudgil ji ek baar phir, gazab dha diya, lajawaab rachna, bahut badhai.

SWAPN said...

wah maudgil ji ek baar phir, gazab dha diya, lajawaab rachna, bahut badhai.

Harsh said...

sir ji post achchi lagi aapko shukria....

रंजना said...

shabd aapke kalam ko chhookar nootan arth aur garima pa jate hain....Waah !!!

मोहन वशिष्‍ठ said...

मौदगिल जी नमस्‍काररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररररर
इतनी लंबी नमस्‍कार आज पहली बार किसी को मिली है ये ऐसे ही नहीं मिल जाती इसके लिए पहले अच्‍छे से अच्‍छा पढाना होता है जो आपने किया है कहो तो दोबारा भी कर दूं

बेहतरीन गजल

Nitish Raj said...

मिलने जैसा वही मजा आने लगा जुदाई में,
वाह...बहुत बढ़िया...बेहतरीन।

Dr. Amar Jyoti said...

'रिश्तेदारी कैसे हो…।'
बहुत ख़ूब! दुष्यन्त की याद ताज़ हो गई।
'उनकी अपील है कि उन्हें हम मदद करें,
चाकू की पसलियों से गुज़ारिश तो देखिये।'
बधाई।

अनिल कान्त : said...

aaina pesh kar diya aapne

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

वाह वाह हकीकत ही कह दी आपने

गौतम राजरिशी said...

मिलने जैसा वही मजा/आने लगा जुदाई में...
वाह, ऐसे शेर लिखना बस आपकी ही अदा हो सकती है योगेन्द्र जी...

राज भाटिय़ा said...

तन मन जुटा कमाई में.
अनबन भाई-भाई में.
रिश्तेदारी कैसे हो..?
बकरे और कसाई में
आप तो भईया बहुत ही सच लिखते हो...
धन्यवाद

ड़ा.योगेन्द्र मणि कौशिक said...

पेट नहीं भरता अब तो
पूर नेक कमाई में
सही कह है आपने।

राजीव तनेजा said...

बुड्ढा, ग़म खाकर बोला,
दे दो ज़हर, दवाई में

कड़वी सच्चाई को आपने खूबसूरती से अपनी रचना में पेश किया है

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

गजब.

बवाल said...

योगी बड्डे !!! वाह वाह वाह वाह!
क्या ब्बात कह गए आप !

मिलने जैसा वही मज़ा,
आने लगा जुदाई में
इस शेर हमारा सलाम क़ुबूल फ़रमाइएगा।

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