आज ५ जनवरी है
तडके लगभग ४ बजे वापसी हुई
पानीपत आ गया
१ जनवरी से सांपला , भुसावल, रतलाम के
कवि सम्मेलनों को निबटाते हुए थकान के मारे सोकर अब उठा हूँ
और देखता हूँ कि इस बीच और क्या-क्या हुआ...
कुछ विशेष समझ में नहीं आ रहा कि
क्या लिखूं क्या पोस्ट करूं
फिर भी दो दोहे प्रस्तुत करता हूँ
कि
सच में मोती सीप सम प्रीत सुखद अनमोल
पर तन को सांकल लगा मन की सांकल खोल
क्या बतलाएं आपको अनहोनी का हाल
चिंतित दुनिया हो रही मस्ती से कंगाल
--योगेन्द्र मौदगिल