HASYA KAVI YOGINDER MOUDGIL

8 comments:

विवेक सिंह said...

पूरा नहीं देख पाए, रूठ गई जूतियाँ ।

बहुत अच्छी प्रस्तुति । वाह !

प्रवीण पाण्डेय said...

वाह वाह क्या कहना।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह आज तो पढ़ना ही नहीं पड़ा, सुन कर ही काम चल गया :)

डॉ टी एस दराल said...

वाह , वाह , वाह , योगेन्द्र जी । बढ़िया प्रस्तुति ।

मोहन वशिष्‍ठ 9991428447 said...

very well presentesion moudgill ji very well

AlbelaKhatri.com said...

बहुत सुन्दर !

ज़बरदस्त !

Udan Tashtari said...

वाह..आनन्द आया जूता पुराण सुन कर.

डा. अरुणा कपूर. said...

वाकई गजल पढ कर बहुत मजा आया!...बधाई एवं शुभकामना के लिए धन्यवाद!