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बच्चियां अब बड़ी हो गयीं.............

घर में चिन्ता खड़ी हो गयीं.
बच्चियां अब बड़ी हो गयीं.

फूल हैरान हैं आजकल,
तितलियां सरचढ़ी हो गयीं.

इंद्र जैसी हुई कामना,
इंद्रियां उर्वशी हो गयीं.

बात-बातों में ढहने लगी,
बस्तियां भुरभुरी हो गयीं.

सुखनवर हो गया लो शह्र,
फिर नशिस्तें खरी हो गयीं.

पत्ते झड़ने लगे शाख से ,
वेदनाएं हरी हो गयीं.

पेट भरता नहीं 'मौदगिल',
बाजुएं अधमरी हो गयीं.
--योगेन्द्र मौदगिल