Showing posts with label दोहे. Show all posts
Showing posts with label दोहे. Show all posts

तीन दोहे आते वसन्त के नाम.....

आप सब को 
प्रणाम निवेदित करता हूँ
इस बार का कविसम्मेल्नीय सत्र कुछ लम्बा चला. 
इस बीच दिल्ली, कुरुक्षेत्र व् पंचकूला सहित कुछ और यात्राएं रही... 
पानीपत में बिजली का कहर भी रहा.. और घरेलु व्यस्तताएं भी.....
इन सब के बीच 
अपने स्वास्थ्य से लोहा लेता मैं 
एक बार पुन: आप सब के बीच 
तीन दोहों के साथ उपस्थित हूँ..

तीन दोहे आते वसन्त के नाम 


वासंती संवेदना सुंदर रूप अनूप
रितुगंध अठखेलियाँ काम मोक्ष का रूप

कलकल बहते नीर का शोर सुखद स्वछन्द
प्रेम सुधा का कूल ज्यों रति-मदन आनंद

जय वसन्त जय जय वसन्त ऋतुकुंवर ऋतुराज
नवल धवल नूतन सबल नव्य सनातन साज़
--योगेन्द्र मौदगिल