महा कमीण
एक बर की बात...
म्हारे महाकंजूस ताऊ के खानदानी पंडत नै बताया अक् ताऊ, अगर तू जिंदगी मैं और भी मजे लेण चाहवै तो पांच कमीणों को भोजन करवा दे...
ईब भाई ताऊ महा कंजूस... पांच कमीणों नै भोजन क्यूक्कर करवावै...?
सोच म्हं पड़ग्या....
ताई बोल्ली, रै ताऊ, सोच मैं ना पड़ै, तेरा जनम संवर जे गा, पांच कमीणों नै भोजन करवा दे....
ताऊ बोल्या पर पांच कमीण मिलेंगें कहां...?
ताई बोल्ली, घबरावै मत, गाम के बाहर पुलिस चौक्की सै, पांच पुलिसिये जिमा दे, बस होग्या काम....
ताऊ नै बी बात जंच गी अर उसनै पांच पुलिस आले जिमा दिये.....
सारे गाम म्हं रुक्का पड़ग्या..
अर अगले ई दिन बिजली वाले ताऊ के घरां पहोंचगे...
अर बोल्ले, रै ताऊ, तनै यै के करया, म्हारे महकमे की नाक कटवा दी... पांच पुलिसिये जिमा दिये.... तू तो मान्या होया कंजूस सै... नयू बता तनै यें क्यूं जिमाये.....?
ताऊ बिचारा सीधा सादा. साफ-साफ बता दी. अक भाई पंडत नै कहया था, अक पांच कमीण जिमाणें सैं, तो मन्नै पांच पुलिसिये जिमा दिये....
या सुणते ई बिजली आले नै ताऊ कै दो धरे.... अर बोलया.... रै ताऊ, तनै सरम कोनी आई...?
तनै पांच पुलिस आले जिमाये.... बस एक बिजली आले नै जिमा देत्ता....
तनै बेरा कोनी... एक बिजली आला पांच पुलिसियां के बरोब्बर सै.....
--योगेन्द्र मौदगिल