हरियाणे का चौपाली किस्सा....

महा कमीण

एक बर की बात...
म्हारे महाकंजूस ताऊ के खानदानी पंडत नै बताया अक् ताऊ, अगर तू जिंदगी मैं और भी मजे लेण चाहवै तो पांच कमीणों को भोजन करवा दे...
ईब भाई ताऊ महा कंजूस... पांच कमीणों नै भोजन क्यूक्कर करवावै...?
सोच म्हं पड़ग्या....

ताई बोल्ली, रै ताऊ, सोच मैं ना पड़ै, तेरा जनम संवर जे गा, पांच कमीणों नै भोजन करवा दे....
ताऊ बोल्या पर पांच कमीण मिलेंगें कहां...?

ताई बोल्ली, घबरावै मत, गाम के बाहर पुलिस चौक्की सै, पांच पुलिसिये जिमा दे, बस होग्या काम....
ताऊ नै बी बात जंच गी अर उसनै पांच पुलिस आले जिमा दिये.....

सारे गाम म्हं रुक्का पड़ग्या..

अर अगले ई दिन बिजली वाले ताऊ के घरां पहोंचगे...
अर बोल्ले, रै ताऊ, तनै यै के करया, म्हारे महकमे की नाक कटवा दी... पांच पुलिसिये जिमा दिये.... तू तो मान्या होया कंजूस सै... नयू बता तनै यें क्यूं जिमाये.....?

ताऊ बिचारा सीधा सादा. साफ-साफ बता दी. अक भाई पंडत नै कहया था, अक पांच कमीण जिमाणें सैं, तो मन्नै पांच पुलिसिये जिमा दिये....

या सुणते ई बिजली आले नै ताऊ कै दो धरे.... अर बोलया.... रै ताऊ, तनै सरम कोनी आई...?

तनै पांच पुलिस आले जिमाये.... बस एक बिजली आले नै जिमा देत्ता....

तनै बेरा कोनी... एक बिजली आला पांच पुलिसियां के बरोब्बर सै.....
--योगेन्द्र मौदगिल

14 comments:

महफूज़ अली said...

Very good...

डॉ. मनोज मिश्र said...

वाह जी वाह.

sangeeta swarup said...

:):) बढ़िया कटाक्ष

राजीव तनेजा said...

बढ़िया कटाक्ष

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

ha-hA-HAAAA :D

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

हा हा हा..भई वाह्! मौदगिल जी...स्वाद सा आ गया :-)

राज भाटिय़ा said...

बिलकुल सही कहा यह पुलिस वाले ओर बिजली वाले सगे भाई है:)यानि जो बडा वो महा कमीणा

नीरज गोस्वामी said...

भाई जी आप भी लगता है बिजली वालों के सताए हुए हैं..प्रेमिका की तरह जो रूठ के चली जाती है तो बहुत मनुहार इसरार के बाद भी नहीं लौटती कमबख्त...तब प्रेमिका प्रेमिका नहीं कमीनी ही लगती है...सावन में प्रेमिका और गर्मी में बिजली के ना आने से दोनों कमीनी ही लगती हैं...जोर दार रचना भाई जी मज़ा आ गया..
नीरज

नीरज जाट जी said...

एक बिजली आला पांच कमीणो के बरोब्बर सै?
मतबल इतणा ठाड्या होवै?

पी.सी.गोदियाल said...

पांच कमीण जिमाणे सै, तो मन्ने पांच पुलिसये जिमा दिए ....हा.हा.हा.हा.हा.हा.हा.हा.हा


Waah, maudgil sahaab !!!!!

ढपो्रशंख said...

मेरे यार कवि महाराज इससे बढिया तो एक आधा ब्लागर जिमा देना चाहिये था.

अर्शिया said...

अति सुंदर।
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क्या हमें ब्लॉग संरक्षक की ज़रूरत है?
नारीवाद के विरोध में खाप पंचायतों का वैज्ञानिक अस्त्र।

'उदय' said...

...दमदार-शानदार-जानदार !!!

Maria Mcclain said...

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