तुम श्लील कहो अश्लील कहो.....

तुम श्लील कहो अश्लील कहो.....


एड्स विश्व की
सर्वाधिक विकृत बीमारी है
किन्तु फिर भी
सारा विश्व इसका आभारी है
क्योंकि जिस दिन डाक्टर
इस का इलाज जान लेंगे

तो ये कमबख्त दुनिया वाले

इसे भी :स्टेटस-सिम्बल' मान लेंगे.....

अपनी कारगुजारियां और तजुर्बे
मित्रों के गिरोह में बतियाएंगे
गोष्ठियों में इस तरह अनुभव सुनाएँगे
एक कहेगा कि
मैं डेढ़ सौ इस्त्रियों के साथ सो चूका हूँ
दूसरा कहेगा
अबे चुप्प
मैं तीन सौ लौंडो को धो चुका हूँ
तीसरा ठहाके से मुस्कुराएगा
और चौड़ा हो कर सुनाएगा
कि हमारा तजुर्बा
सब से भारी है
अरे
तुम को सेक्स के बारे में कुछ भी नहीं आता है
हमें देखो
हम सीधा स्वर्ग कि सैर कर के आता है
क्योंकि सुबह सेक्स करता है
शाम को सेक्स करवाता है..
** योगेन्द्र मौदगिल

नोट :- नीले रंग में कम्पोज भाग  पूर्व प्रकाशित है इस से आगे कम्पोज काली पंक्तियाँ सानुरोध प्रकाशित हैं.

10 comments:

नीरज गोस्वामी said...

भाई जी आपके सेन्स आफ ह्यूमर का जवाब नहीं...लाजवाब है जी...गज़ब का लेखन.

नीरज

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

शेष भाग पूरा करने में बडे दिन लगा दिये,
इन मनचलो ने टांग पकड तो नहीं रखी थी?
हमारे समाज में ऐसे भी मिल जायेंगे जो आपकी बात सच साबित कर दे

अन्तर सोहिल said...

स्टेटस सिंबल
कुछ भी हो सकता है मानव जाति में
पशुओं के लिये स्टेट्स सिंबल के कोई मायने नहीं हैं और मानव पशुता में स्टेट्स सिंबल ढूंढता है।

प्रणाम स्वीकार करें

अन्तर सोहिल said...

कुछ लोगों को इन पंक्तियों पर आपत्ति हो सकती है। लेकिन अभिव्यक्ति के लिये ये जरुरी था।
शीर्षक में आपका भय दिखता है, लेकिन बेफिक्र रहें। यहां सब बालिग हैं और आपकी बात को समझेंगें।

इंतजार था और भरोसा भी कि आप इस रचना को हमें पूरा जरुर पढवायेंगें।

प्रणाम और धन्यवाद भी

Sunil Kumar said...

शीर्षक देख कर तो घबरा गया था अंदर तो एक चेतावनी है लोगों को .....

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

मुझे लगा कि गोपाल प्रसाद साहब की कविता और उसके परिप्रेक्ष्य में कुछ होगा. बहुत तीखा व्यंग्य है.

श्रद्धा जैन said...

he he

प्रवीण पाण्डेय said...

हा हा।

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

लीगल सैल से मिले वकील की मैंने अपनी शिकायत उच्चस्तर के अधिकारीयों के पास भेज तो दी हैं. अब बस देखना हैं कि-वो खुद कितने बड़े ईमानदार है और अब मेरी शिकायत उनकी ईमानदारी पर ही एक प्रश्नचिन्ह है

मैंने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर श्री बी.के. गुप्ता जी को एक पत्र कल ही लिखकर भेजा है कि-दोषी को सजा हो और निर्दोष शोषित न हो. दिल्ली पुलिस विभाग में फैली अव्यवस्था मैं सुधार करें

कदम-कदम पर भ्रष्टाचार ने अब मेरी जीने की इच्छा खत्म कर दी है.. माननीय राष्ट्रपति जी मुझे इच्छा मृत्यु प्रदान करके कृतार्थ करें मैंने जो भी कदम उठाया है. वो सब मज़बूरी मैं लिया गया निर्णय है. हो सकता कुछ लोगों को यह पसंद न आये लेकिन जिस पर बीत रही होती हैं उसको ही पता होता है कि किस पीड़ा से गुजर रहा है.

मेरी पत्नी और सुसराल वालों ने महिलाओं के हितों के लिए बनाये कानूनों का दुरपयोग करते हुए मेरे ऊपर फर्जी केस दर्ज करवा दिए..मैंने पत्नी की जो मानसिक यातनाएं भुगती हैं थोड़ी बहुत पूंजी अपने कार्यों के माध्यम जमा की थी.सभी कार्य बंद होने के, बिमारियों की दवाइयों में और केसों की भागदौड़ में खर्च होने के कारण आज स्थिति यह है कि-पत्रकार हूँ इसलिए भीख भी नहीं मांग सकता हूँ और अपना ज़मीर व ईमान बेच नहीं सकता हूँ.

देवेन्द्र पाण्डेय said...

स्टेटस-सिम्बल!
एड्स के साथ जुड़कर इस शब्द की मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई है।
..करारा कटाक्ष है।