स्टेटस-सिम्बल'

लघु-व्यंग्य

स्टेटस-सिम्बल'

एड्स विश्व की
सर्वाधिक विकृत बीमारी है
किन्तु फिर भी
सारा विश्व इसका आभारी है
क्योंकि जिस दिन डाक्टर
इस का इलाज जान लेंगे
तो ये कमबख्त दुनिया वाले
इसे भी
:स्टेटस-सिम्बल' 
मान लेंगे.....
 इसे भी स्टेटस-सिम्बल' मान लेंगे.....

** योगेन्द्र मौदगिल 
नोट :- दरअसल ये कविता यहीं पर समाप्त नहीं होती. 
कुछ विकृति-चित्रण और भी अनायास ही हो गया...
मित्र-मण्डली ने पसंद तो किया पर भाव में हल्की अश्लीलता की मोहर भी लगा दी.....
आप सब सुधि पाठकों पर निर्णय छोड़ता हूँ कि 
इस कविता का शेष भाग प्रकाशित करूं या नहीं.....?

19 comments:

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

पूरा भाग दिखाओ जी,
ज्यादा अश्लील मत दिखाना,
इस बीमारी को तो केवल हरामी, लुच्चे, लफ़ंगे ही स्टेटस सिम्बल बना सकते है,
जिसको ये बीमारी किसी की गलती से मिली होगी उसके दिल से पूछिये।

अन्तर सोहिल said...

यही मित्र मण्डली जब एस एम एस भेजती है तो उसमें सेंसर नहीं लगाती तो आप क्यों एक व्यंग्य रचना से हमें महरूम कर रहे हैं। सुना दीजिये पूरी कविता
बालिग हैं हम :)

प्रणाम

नरेश सिह राठौड़ said...

ओर आण दो |

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अच्छा व्यंग ...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

पूरी कविता पेश की जाये... आपका स्वास्थ्य कैसा है..

प्रवीण पाण्डेय said...

वाह, क्या धोया है।

योगेन्द्र मौदगिल said...

abhi tak ki voting ka aashay hai ki poori kavita post kar doon. to theek hai kal dopahar tak prakashit kar doonga.......

Anonymous said...

http://aduanapt.blogspot.com/

मनोज कुमार said...

सही परिभाषा।

Sadhana Vaid said...

सटीक व्यंग !

देवेन्द्र पाण्डेय said...

करारा व्यंग्य।
पूरी कविता तो पढ़नी ही पड़ेगी। अधूरी में क्या मजा है।

Anil Pusadkar said...

गज़ब की धार है,आपकी कलम में।

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

प्रिय दोस्तों! क्षमा करें.कुछ निजी कारणों से आपकी पोस्ट/सारी पोस्टों का पढने का फ़िलहाल समय नहीं हैं,क्योंकि 20 मई से मेरी तपस्या शुरू हो रही है.तब कुछ समय मिला तो आपकी पोस्ट जरुर पढूंगा.फ़िलहाल आपके पास समय हो तो नीचे भेजे लिंकों को पढ़कर मेरी विचारधारा समझने की कोशिश करें.
दोस्तों,क्या सबसे बकवास पोस्ट पर टिप्पणी करोंगे. मत करना,वरना......... भारत देश के किसी थाने में आपके खिलाफ फर्जी देशद्रोह या किसी अन्य धारा के तहत केस दर्ज हो जायेगा. क्या कहा आपको डर नहीं लगता? फिर दिखाओ सब अपनी-अपनी हिम्मत का नमूना और यह रहा उसका लिंक प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से
श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी लगाये है.इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है.मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.
क्या ब्लॉगर मेरी थोड़ी मदद कर सकते हैं अगर मुझे थोडा-सा साथ(धर्म और जाति से ऊपर उठकर"इंसानियत" के फर्ज के चलते ब्लॉगर भाइयों का ही)और तकनीकी जानकारी मिल जाए तो मैं इन भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने के साथ ही अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हूँ.
अगर आप चाहे तो मेरे इस संकल्प को पूरा करने में अपना सहयोग कर सकते हैं. आप द्वारा दी दो आँखों से दो व्यक्तियों को रोशनी मिलती हैं. क्या आप किन्ही दो व्यक्तियों को रोशनी देना चाहेंगे? नेत्रदान आप करें और दूसरों को भी प्रेरित करें क्या है आपकी नेत्रदान पर विचारधारा?
यह टी.आर.पी जो संस्थाएं तय करती हैं, वे उन्हीं व्यावसायिक घरानों के दिमाग की उपज हैं. जो प्रत्यक्ष तौर पर मनुष्य का शोषण करती हैं. इस लिहाज से टी.वी. चैनल भी परोक्ष रूप से जनता के शोषण के हथियार हैं, वैसे ही जैसे ज्यादातर बड़े अखबार. ये प्रसार माध्यम हैं जो विकृत होकर कंपनियों और रसूखवाले लोगों की गतिविधियों को समाचार बनाकर परोस रहे हैं.? कोशिश करें-तब ब्लाग भी "मीडिया" बन सकता है क्या है आपकी विचारधारा?

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

पति द्वारा क्रूरता की धारा 498A में संशोधन हेतु सुझाव अपने अनुभवों से तैयार पति के नातेदारों द्वारा क्रूरता के विषय में दंड संबंधी भा.दं.संहिता की धारा 498A में संशोधन हेतु सुझाव विधि आयोग में भेज रहा हूँ.जिसने भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के दुरुपयोग और उसे रोके जाने और प्रभावी बनाए जाने के लिए सुझाव आमंत्रित किए गए हैं. अगर आपने भी अपने आस-पास देखा हो या आप या आपने अपने किसी रिश्तेदार को महिलाओं के हितों में बनाये कानूनों के दुरूपयोग पर परेशान देखकर कोई मन में इन कानून लेकर बदलाव हेतु कोई सुझाव आया हो तब आप भी बताये.

दिगम्बर नासवा said...

गुरुदेव सभी परिपक्व हैं ... लिख़्ड़ो ... इतना ग़ज़ब का व्यंग है ... क्या कहने आपकी . की धार के ...

singh said...

इसे भी स्टेटस-सिम्बल' मान लेंगे.....

सही फ़रमाया मौदगिल जी

दिनेश शर्मा said...

सच तो कड़वा होता ही है । फिर रही बात अश्लीलता की सो तो समाज में बहुत फैल गयी है उसे कैसे रोकेंगे आप!

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

# इस कविता का शेष भाग प्रकाशित करूं या नहीं.....?

दादा ! अब सिर ओखली में दिया हुआ है तो … चिंता किस बात की ? :)
धन्य है यह स्टेटस-सिम्बल भी !

पुरानी कई पोस्ट्स आज पढ़ी हैं स्वास्थ्य का ध्यान रखें
कभी कवि सम्मेलनीय जिम्मेवारी हमें सौंप दिया करें … ;)

हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

- राजेन्द्र स्वर्णकार

Richa P Madhwani said...

http://shayaridays.blogspot.com