सुन लो वही कहानी एक.......

मित्रों आप सब के लिये एक ग़ज़ल लेकर फिर उपस्थित हूं........ देखियेगा...





सुन लो वही कहानी एक.
इक था राजा-रानी एक.

दिल भी यकसां हो जाये,
ग़र हो दाना-पानी एक.

पुनः जरूरत है प्यारे,
झांसी की मरदानी एक.

पूत कपूत भी निभ जाये,
बिटिया भली सयानी एक.

मुद्दत से मैं ढूंढ रहा,
लैला सी दीवानी एक.

क्या जेहलम, क्या गंगा जी,
मुझको लगता पानी एक.

हमें 'मौदगिल' क्या चिन्ता,
हम हैं राजा-जानी एक.
--योगेन्द्र मौदगिल

33 comments:

दिनेश शर्मा said...

पुनः जरूरत है प्यारे,
झांसी की मरदानी एक.

पूत कपूत भी निभ जाये,
बिटिया भली सयानी एक.

बहुत अच्छा लिखा है,सही लिखा है ।
साधुवाद !

AlbelaKhatri.com said...

kya jhelam kya gangaji
mujhko lagta pani ek
___________________waah waah kya baat hai !
BADHAAI !

P.N. Subramanian said...

बहुत सुन्दर. हम तो चिंतित हैं मिली की नहीं? "मुद्दत से मैं ढूंढ रहा,
लैला सी दीवानी एक"

मीत said...

बहुत बढ़िया है भाई. क्या बात है !!

राजीव तनेजा said...

पूत कपूत भी निभ जाये,
बिटिया भली सयानी एक.

बहुत बढिया

रविकांत पाण्डेय said...

क्या जेहलम, क्या गंगा जी,
मुझको लगता पानी एक.

अहा! आनंदम! अतिआनंदम! तीर बिल्कुल सही निशाने पर लगा है।

डॉ. मनोज मिश्र said...

bahut sundr gazal hai bhai jee .

"अर्श" said...

दिल भी यकसां हो जाये,
ग़र हो दाना-पानी एक.

is she'r ke baare me jitani taarif karun wo kam padta jayega....... aur maaloom bhi hai ke aap hi bas aisaa likh sakte hai.... dhero badhaayee sahib...


arsh

ताऊ रामपुरिया said...

लाजवाब भाई.

रामराम.

Mumukshh Ki Rachanain said...

छोटे बहर की उम्दा ग़ज़ल,
बधाई.

चन्द्र मोहन गुप्त

Shefali Pande said...

पूत कपूत भी निभ जाये,
बिटिया भली सयानी एक.
bahut khoob.......

अभिषेक ओझा said...

जरा ऑडियो फाइल लगा दीजिये एक बार... सुनाने की इच्छा हो चली है. और पिछली पोस्ट के जीवन सूत्र तो कमाल के थे. वाह !

राज भाटिय़ा said...

वाह क्या बात है बहुत सुंदर जी,धन्यवाद

मुझे शिकायत है
पराया देश
छोटी छोटी बातें
नन्हे मुन्हे

Anil Pusadkar said...

बहुत बढिया योगेन्द्र भाई मै भी मुद्द से ढूंढ रहा हूं लैला एक्।

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर लिखा है .. बधाई।

Mrs. Asha Joglekar said...

दिल भी यकसां हो जाये,
ग़र हो दाना-पानी एक.
सच्ची बात ।

SWAPN said...

wah maudgil ji , hamesha ki tarah aapke blog ka ek aur ratn. lajawaab rachna. badhai.

Udan Tashtari said...

गज़ब भाई..बहुत बेहतरीन!!

कौतुक रमण said...

भली लगी यह कहानी एक.

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

दिल भी यकसां हो जाये,
ग़र हो दाना-पानी एक.

लाजवाब.......बेहतरीन!!!!

M.A.Sharma "सेहर" said...

क्या जेहलम, क्या गंगा जी,
मुझको लगता पानी एक.

Wah !! sambhav darshati sundar ghazal !

महामंत्री - तस्लीम said...

बहुत खूब।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

seema gupta said...

पुनः जरूरत है प्यारे,
झांसी की मरदानी एक.

पूत कपूत भी निभ जाये,
बिटिया भली सयानी एक.
" बहुत ही जानदार बात कह डाली इन पंक्तियों ने"

regards

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

aap ka jawab nahin, gaagar me saagar.

नीरज गोस्वामी said...

क्या जेहलम, क्या गंगा जी,
मुझको लगता पानी एक.

भाई जी जो बात लोग पोथी पे पोथियाँ लिख कर समझाते हैं और समझा नहीं पाते वो आपने इस शेर में कह दी...आपकी जितनी प्रशंशा करूं कम ही लगती है...वाह प्रभु वाह...
नीरज

रंजना said...

वाह ! वाह ! वाह !!! क्या बात कही है....लाजवाब ग़ज़ल....सभी शेर अनमोल रत्न से....एक से बढ़कर एक....

Prem Farrukhabadi said...

मुद्दत से मैं ढूंढ रहा,
लैला सी दीवानी एक.
ye na hui baat.

अंकित "सफ़र" said...

नमस्कार यौगेन्द्र जी,
उम्दा ग़ज़ल है. छोटे बहर की ग़ज़ल में आपने आसान लफ्जों को बेहद खूबसूरत अंदाज़ में पिरोया है.
ये शेर बहुत पसंद आये.
पूत कपूत भी निभ जाये,
बिटिया भली सयानी एक.

क्या जेहलम, क्या गंगा जी,
मुझको लगता पानी एक.

दिगम्बर नासवा said...

पूत कपूत भी निभ जाये,
बिटिया भली सयानी एक.

मुद्दत से मैं ढूंढ रहा,
लैला सी दीवानी एक.

क्या जेहलम, क्या गंगा जी,
मुझको लगता पानी एक.

padhte padhte साड़ी ग़ज़ल ही utaar देता टिपण्णी में............... kyuni सारे के सारे शेर lajawab हैं........ anmol moti की तरह

mahashakti said...

सार्थक रचना, पढ़ कर बहुत अच्‍छा लगा।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

आप तो ग़ज़ल के उस्ताद ठहरे जी! क्या शब्दों को नगीने की तरह जड़ दिया है आपने। भाव भी बड़े उम्दा हैं। दो शेर मैं भी जोड़ता हूँ:

मजे लिए जा बढ़-चढ़कर
मिलती सिर्फ़ जवानी एक

ग़ज़ल करे मस्ती लेकिन
निभती रहे रवानी एक
:)

Nirmla Kapila said...

पुनः जरूरत है प्यारे,
झांसी की मरदानी एक.
बहुत खूबसूरत आभार्

Babli said...

बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है!