आप सबने पिछली पोस्ट में देखा और खूब देखा
अनिल भाई जी ने तिलक किया टोपी पहनायी बढ़िया मगर साहब जिस अपनेपन और सादगी से मंद-मंद मुस्कुराते हुए पहली भेंट के रूप में भरे मंच पर ठहाकों के बीच लगभग आठ इंच लंबा और पौने तीन इंची व्यास का बचपन की गलतियों जैसा टेढ़ा कटहल प्रदान किया तो मैं झूम गया
आदरेय विद्याचरण शुक्ल तक मुस्कुराये
होली की मस्ती अभी भी है
शायद तब तक रहेगी जब तक इस सीज़न के कविसम्मेलन
कल याने २० को झालावाड़ २१ को सोनीपत २५ को पट्टीकल्याणा २७ को निगाही सोनभद्र ३ को समालखा
भिवानी कविसम्मेलन के चित्रादि अगली पोस्ट में
अनिल जी रायपुर में महिलायें शायद पत्रकारिता से दूर रहती हैं ?
बहरहाल
एक क्षणिका पेश करता हूं कि
मलेरिया
उन्मूलन विभाग के
कर्मचारी
सुदूर गांव में आये
मलेरिया की दवा
मुफ्त दे गये
बदले में
एड्स मुफ्त ले गये
--योगेन्द्र मौदगिल