रामलीला मैदान में डटे शूरवीरों को समर्पित
आज का मुक्तक.....एक छंद के साथ
भ्रष्टों की एकता का नया वार देख लो..
सत्ता का नशा बोलता है यार देख लो..
इन सब दलों को देख के पछता रहे हैं हम,
ये कैसे-कैसे चुन लिए गद्दार देख लो..
जाति और धरम से ऊंचा है हमारा देश,
भारती की जय-जैकार मन में बसाई हो..
भ्रष्टाचार भाग जाए, स्विस-धन लौट आए,
देश में हो राम-राज दूर महंगाई हो..
छल व् प्रपंच-झूठ, राजनीति में न रहे,
जन लोकपाल बिल की ही अगुवाई हो..
संभव ये हो सकेगा जब सारे ठान लेंगे,
बच्चा-बच्चा अन्ना जी का पूरा अनुयायी हो..
--योगेन्द्र मौदगिल