घनाक्षरी कवित्त या छंद या जो भी हो में मुझे लगता है कि तुकांत बदले नहीं जाते
किंतु विषय व कहन के अनुसार निम्न रचना में तुकांत बदल गये
रचना प्रस्तुत है
मैंने इसे संवाद-छंद शीर्षक दिया है
आप सब सुधिजन इस पर भी ध्यान दें
संवाद-छंद
मल्लिका शेरावत आधा मीटर कपड़ा लेकर दरज़ी के पास गयी
ऒर पूछने लगी कि इसमें मेरी तीन ड्रैस बन जायेंगी ना
दरज़ी ने मल्लिका को देखा फिर कपड़े को नापा और कहा
तीन तो बन जाएंगी पर बहन जी
जो कपड़ा बचेगा उसका क्या बनेगा..?
ऒर पूछने लगी कि इसमें मेरी तीन ड्रैस बन जायेंगी ना
दरज़ी ने मल्लिका को देखा फिर कपड़े को नापा और कहा
तीन तो बन जाएंगी पर बहन जी
जो कपड़ा बचेगा उसका क्या बनेगा..?
मित्रों इसी मंचीय टिप्पणी से प्रेरित यह संवाद छंद देखें
कि
मल्लिका शेरावत को जूसर घुमाते देख
नौकर बोला मैडम आप ये क्या घुमा रही हो
जूस की जरूरत हो तो मुझको आदेश करो
आप भला खुद ही क्यों जूस बना रही हो
मल्लिका तुनक के बोली हट मुए बेवकूफ
तेरे जैसा नौकर पाके भाग्य खो रही हूं मैं
दिखता नहीं क्या तुझे हो गया है सूरदास
जूसर में चोली-लहंगे को धो रही हूं मैं
--योगेन्द्र मौदगिल