टिप्पणियां गवाह हैं
कुछ पुराने मित्रों का पुनरागमन हुआ है
कुछ नए मित्र भी जुड़े हैं.
सभी को प्रणाम निवेदित करते हुए चार पंक्तियाँ सौंपता हूँ कि
नेताऒं को दूध पिलाना ठीक नहीं
नाग पंचमी रोज मनाना ठीक नहीं
किसी ने खादी किसी ने भगवा धार लिया
जनता को इतना बहकाना ठीक नहीं
कुछ तो सालों शर्म करो नौकरशाहों
खुल्लमखुल्ला देश चबाना ठीक नहीं
गली, मोहल्ला, लोग तमाशा देखेंगें
भाई-भाई का टकराना ठीक नहीं
--योगेन्द्र मौदगिल