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बोल हुआ........

जब से तन अन्मोल हुआ.
मन मिट्टी के मोल हुआ.

शीरीं वादे टूट गये,
कड़वा-कड़वा बोल हुआ.

देख मुझे असमंजस में,
वो भी डांवाडोल हुआ.

बादल ने अंगड़ाई ली,
मौसम भी रमझोल हुआ.

गीली मिट्टी सुबक रही,
देख केंचुआ गोल हुआ.

बाहर सारे राम बने,
घर में रावणरोल हुआ.
--योगेन्द्र मौदगिल