आज से पावन हुई......

बगैर किसी विशिष्ट भूमिका के आप सब के स्नेह-संबल को सादर समर्पित कुछ और पंक्तियां



देह भी दुनिया में विग्यापन हुई.
नग्नता भी आजकल फैशन हुई.

एक कुटिया ढह गयी बरसात में,
रोते-रोते आंख भी सावन हुई.

हमने दुक्खों को निमन्त्रण दे दिया,
घर की देहरी आज से पावन हुई.

एक विरहिन और करवाचौथ की,
आईने के सामने अनबन हुई.

मेरे स्वैटर के डिज़ाइन के लिये,
आंख उसकी देर तक जोगन हुई.

और आंगन में उठी किलकारियां,
प्रीत अपने वक्त पर मधुवन हुई.
--योगेन्द्र मौदगिल

24 comments:

विनय प्रजापति said...
This comment has been removed by the author.
‘नज़र’ said...

aapke blog par navigation bar set karni rah gayi thii, usmein vijnaan ke links hain, apna password bhejiye, main sahi kar deta hoon.

- vinay prajapati

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

अच्छी है।

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया रचना है बधाई\

Kishore Choudhary said...

बहुत बढ़िया आपकी प्रतिष्ठा के अनुरूप !

अर्चना तिवारी said...

सुन्दर अभिव्यक्ति...

ओम आर्य said...

behad khubsoorat bhaw........sach hai bhai

Mithilesh dubey said...

बहुत बढिया रचना है बधाई

राजीव तनेजा said...

हमेशा की तरह एक और बढिया रचना

Arvind Mishra said...

मेरे स्वैटर के डिज़ाइन के लिये,
आंख उसकी देर तक जोगन हुई.
हा हा यह भी बढियां है !

अमिताभ मीत said...

एक कुटिया ढह गयी बरसात में,
रोते-रोते आंख भी सावन हुई.

हमने दुक्खों को निमन्त्रण दे दिया,
घर की देहरी आज से पावन हुई.

Kya baat hai !!

सतीश सक्सेना said...

बहुत बढ़िया भावपूर्ण रचना !

Anil Pusadkar said...

अच्छी और सच्ची रचना।

कंचन सिंह चौहान said...

और आंगन में उठी किलकारियां,
प्रीत अपने वक्त पर मधुवन हुई.

waah...uttam...pawan

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

वन्स मोर.

पंकज सुबीर said...

कंचन ने पूरी ग़ज़ल में से दुर्लभ और पावन मोती छांटा है । आनंद आ गया प्रीत अपने वक्‍त प मधुबन हुई । बिना किसी संकेत के गूढ़ बात को कहने का ये तरीका मन को गुदगुदा गया । बधाई आपको ।

सतपाल said...

देह भी दुनिया में विग्यापन हुई.
नग्नता भी आजकल फैशन हुई
darusut farmaya aapne, ethics and values are for middle class only.

अर्शिया अली said...

शानदार ग़ज़ल.
{ Treasurer-T & S }

डाकिया बाबू said...

Wak..bahut khub janab !! Kabhi Dakiya babu ke yahan bhi tashrif laiye na !!

Vijay Kumar Sappatti said...

bahut badhiya sir ji .. padhkar duniya ke saare rang dekhne ko mil gaye ji ..

badhai ho sir ji ...

aabhar

vijay

pls read my new poem "झील" on my poem blog " http://poemsofvijay.blogspot.com

दिगम्बर नासवा said...

हमने दुक्खों को निमन्त्रण दे दिया,
घर की देहरी आज से पावन हुई.

ALAG ALAG RANG MEIN RANGE HAI SAARE SHER GURU DEV.... KOMAL, MASOOM, CHUTKILETE, DIL KO CHOOTE...... LAJAWAB HAI POORI GAZAL... PRANAAM HAI AAPKI LEKHNI KO

गौतम राजरिशी said...

नमन है गुरूवर...क्या शेर गढ़े हैं...आह!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

बहुत सुंदर.

विनोद कुमार पांडेय said...

badhiya gazal yogendra ji..
badhayi swikaar kare..