बस हवाऒं का इशारा चाहिये......

युद्धरत यदि सर्वहारा चाहिये
जीतने पर विश्व सारा चाहिये

हार बैठे जंग हम तो क्या हुआ
एक हमला फिर दुबारा चाहिये

मध्यवर्गी जिन्दगी का लक्ष्य है
सिर्फ सुविधा से गुजारा चाहिये

होंसला टूटे न तो इन्सान को
एक तिनके का सहारा चाहिये

राख शोलों को उगल देगी अभी
बस हवाऒं का इशारा चाहिये

भव्य कविता की इमारत के लिये
कल्पना का ईंट-गारा चाहिये
--योगेन्द्र मौदगिल

18 comments:

विवेक सिंह said...

इस गज़ल को पढने के बाद तो मैं आपको हास्य व्यंग्य कवि न कह कर साम्यवाद का वीररस कवि कहूँगा . माफ करें .

Anil Pusadkar said...

vivek ji se puri tarah sahmat hun.

pallavi trivedi said...

हार बैठे जंग हम तो क्या हुआ
एक हमला फिर दुबारा चाहिये

मध्यवर्गी जिन्दगी का लक्ष्य है
सिर्फ सुविधा से गुजारा चाहिये

होंसला टूटे न तो इन्सान को
एक तिनके का सहारा चाहिये
bahut khoob..ek alag andaaz ki ghazal.

Dr. Amar Jyoti said...

बहुत ही सुन्दर। आपके जुझारू तेवरों को सलाम।

जितेन्द़ भगत said...

क्‍या खूब लि‍खा है-

राख शोलों को उगल देगी अभी
बस हवाऒं का इशारा चाहिये

इस जज्‍बात को सलाम।

ताऊ रामपुरिया said...

भव्य कविता की इमारत के लिये
कल्पना का ईंट-गारा चाहिये

बेहतरीन जी ! जोश आ गया हमको भी !

MANVINDER BHIMBER said...

bahut achcha likha hai

कंचन सिंह चौहान said...

badhiya....!

seema gupta said...

होंसला टूटे न तो इन्सान को
एक तिनके का सहारा चाहिये

राख शोलों को उगल देगी अभी
बस हवाऒं का इशारा चाहिये
" bhut jindadile se likhe gyee rachna hai, comendable"
Regards

Arvind Mishra said...

हार बैठे जंग हम तो क्या हुआ
एक हमला फिर दुबारा चाहिये
बहुत ओज है !

अभिषेक ओझा said...

"होंसला टूटे न तो इन्सान को
एक तिनके का सहारा चाहिये"

वैसे तो हर लाइन कमाल की है लेकिन ये पसंद आ गई. बहुत अच्छी रचना.

विनय प्रजापति 'नज़र' said...

bahut hi sindar kruti hai.

राज भाटिय़ा said...

भव्य कविता की इमारत के लिये
कल्पना का ईंट-गारा चाहिये
योगेन्दर जी, आशा से भरपुर हे आप की यह कविता.
धन्यवाद

Udan Tashtari said...

मध्यवर्गी जिन्दगी का लक्ष्य है
सिर्फ सुविधा से गुजारा चाहिये


बहुत खूब!!

Manish Kumar said...

मध्यवर्गी जिन्दगी का लक्ष्य है
सिर्फ सुविधा से गुजारा चाहिये

hmmm sahi kaha aapne :)

Prakash singh "Arsh" said...

मध्यवर्गी जिन्दगी का लक्ष्य है
सिर्फ सुविधा से गुजारा चाहिये

sirf in do line me aapne to sara bharta ka varnan kar diya bahot khub likha hai aapne ...sundar rachana ke liye badhai........

regards
Arsh

योगेन्द्र मौदगिल said...

आप सभी सुधि पाठकों का वंदन-अभिनंदन....

Abhivyakti said...

aap ki is kalpana ko salaam !

bhut khoob ! yogendr ji !